उत्तराखंड : एतिहासिक काल। प्रमुख राजवंश।

उत्तराखंड : एतिहासिक काल।
( गुप्तकाल के दौरान राज्य में प्रमुख राजवंश)

कृतपुर राज्य –

• समुद्र गुप्त की प्रयाग प्रशस्ति में कृतपुर राज्य का वर्णन।
• इनकी राजधानी कार्तिकेयनगर थी।
• कृतपुर राज्य में गढ़वाल कुमाऊं के साथ रुहेलखंड और हिमाचल भी थे।
• राजशेखर की काव्य मीमांसा में यहां एक बलशाली खसाधिपति का उल्लेख है।
• विशाखदत्त के देवीचंद्रगुप्तम और बाणभट्ट के हर्षचरितम मे उसे शकपति कहा गया है।
• इसी शकपती के चंद्रगुप्त के ज्येष्ठ भ्राता रामगुप्त से युद्ध का उल्लेख है।
• कृतपुर राज्य पर हूणों ने आक्रमण किया।
• राहुल सांकृत्यायन के अनुसार हूण राजा तोरमाण और मिहिरकुल के अधीन कुछ हिमालयी भाग रहा।


छ्गलेश राजवंश –

• लाखामंडल के खंडित शिलालेख में उल्लेख।
• पांचवी सदी में यह राजवंश युमना प्रदेश में शासन कर रहा था।
• लाखामंडल अभिलेख में कुल 7 नरेशो के नाम क्रमबद्ध वर्णित हैं।
• प्रथम नाम नरपति जयदास का है।
• अतः इस क्षेत्र में इस वंश का संस्थापक नरपति जयदास माना जा सकता है। 
• अन्य नरेश –
• गुहेश, अचल, छगलेश दास, 
 • रुद्रेश दास और छ्गलेश केतु 


उत्तर गुप्त काल के दौरान राज्य में प्रमुख राजवंश।

सिंहपुर का यदु वंश–

• यदु वंश का संस्थापक सेन वर्मन को माना जाता है।
• इनकी राजधानी लाखामंडल ( देहरादून) थी। जिसका पुराना नाम मढ़ था।
• इनका शासन काल 6–7 वीं सदी के आसपास माना जाता है।
• इनके ग्यारह पीढ़ियों के 12 नारेशों का उल्लेख मिलता है।
• इस राजवंश का लाखामंडल शिलालेख सर्वाधिक प्रसिद्ध है।
• यह शिलालेख भास्कर वर्मन की पुत्री और जालंधर राजकुमार चंद्रगुप्त की पत्नी राजकुमारी ईश्वरा का है।
• राजकुमारी ईश्वरा ने लाखमंडल में शिव मन्दिर भी बनवाया था।

नाग राजवंश –

• यमुना घाटी में यदुओं को परास्त करने का श्रेय इन्हे दिया जाता है।
• इनके अस्तित्व का पता 6–7 वीं सदी में चलता है।
• इस वंश का प्रमुख स्रोत गोपेश्वर का त्रिशूल लेख है।
• यह रूद्रशिव मंदिर गोपेश्वर में है।
• इस लेख में चार नाग नरेशों के नाम अंकित हैं।
• (1) स्कंदनाग  (2) विभुनाग  (3) अंशुनाग (4) गणपतिनाग
• बड़ाहाट का त्रिशूल लेख उत्तरी ब्राह्मी तथा गोपेश्वर त्रिशूल लेख दक्षिणी ब्राह्मी लिपि का है।
• गणपति नाग इस वंश का शक्तिशाली राजा माना जाता था।
• गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त का विवाह नाग राजकुमारी कुबैरनागा से हुआ।
• नागों के बाद इस क्षेत्र में मौखरी वंश में शासन किया।

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