उत्तराखंड : इतिहास से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण अभिलेखीय स्रोत।
उत्तराखंड इतिहास से सम्बंधित प्रमुख अभिलेखीय स्रोत।
• कालसी शिलालेख –
• सबसे प्राचीनतम शिलालेख माना जाता है।
• 257 ई.पू अशोक कालीन शिलालेख है।
• खोज का श्रेय – जॉन फॉरेस्ट ( 1860)
• इसकी लिपि ब्राह्मी एवम भाषा प्राकृत है।
• यह टोंस और यमुना नदी के संगम स्थल पर है।
• इस अभिलेख में इस क्षेत्र को अपरांत और यहां के निवासियों को पुलिन्द कहा गया है।
• कालसी का पुराना नाम सुधनगर या कलकुट था।
• राजकुमारी ईश्वरा का अभिलेख –
• यह अभिलेख जौनसार बाबर क्षेत्र में लक्षेश्वर मंदिर ( शिव मन्दिर) में स्थित है।
• यह अभिलेख पांचवी सदी का माना जाता है।
• इस शिलालेख के अनुसार यमुना उपत्यका में यादवों का राज्य था।
• गोपेश्वर और बाड़ाहाट त्रिशुल लेख–
• गोपेश्वर रुद्रशिव मंदिर में दो अभिलेख मिले हैं।
• पहला 6वी सदी का नागपति नाग का और दूसरा 12वीं सदी का अशोक चल का त्रिशूल अभिलेख मिला है।
• 6वी सदी के नाग वंशी अभिलेख में स्कंद नाग, विभु नाग व अंशु नाग शासकों का भी उल्लेख है।
• इस अभिलेख से स्पष्ट होता है कि 6–7 वी सदी में नागपति नाग ने इस क्षेत्र को जीता था।
• बाड़ाहाट त्रिशुल लेख में शंख लिपी का प्रयोग किया गया है।
• प्रथम और द्वितीय सदी की कुषाण काल की मुद्राएं मुनि–की–रेती और सुमाड़ी से प्राप्त हुई हैं।
• मोरध्वज स्तूप से तीसरी सदी का मुद्रालेख मिला है।
• देवलगढ़ और कोलसारी से मूर्ति पीठीका लेख मिले हैं।
•कीर्तिकेय पुर राजाओं के ताम्र लेख –
• कार्तिकेय पुर राजाओं के ताम्र लेख चार स्थलों से प्राप्त हुए हैं।
• पांडुकेश्वर से चार, कंडारा से एक, चंपावत से एक और बैजनाथ से ताम्र लेख प्राप्त हुए हैं।
• पांडुकेश्वर ताम्र लेख –
• यहां से प्राप्त चार ताम्र लेखों में कत्यूरी राजाओं की राजधानी कार्तिकेयपुर उल्लेखित है।
• एक ताम्र लेख में लेखक गंगाभद्र का भी उल्लेख है।
• इन ताम्र लेखों का उल्लेखन ललितसुर देव ने करवाया था।
• पांडुकेश्वर मंदिर बद्रीनाथ के निकट है।
• बागेश्वर शिलालेख –
• बागेश्वर शिव मन्दिर से कत्यूरी राजा भूदेव का लेख प्राप्त हुआ है।
• इस लेख में 8 कत्यूरी शासकों के नाम अंकित हैं।
• इस शिलालेख के अनुसार प्रथम कत्यूरी शासक बसंत देव था।
• धारशिल शिलालेख –
• यह गढ़वाल क्षेत्र से प्राप्त प्राचीनतम अभिलेख है।
• यह ऊखीमठ से प्राप्त हुआ है।
• यह पंवार शासक अनन्त पाल का है।
•अल्मोड़ा सिक्के –
• ये कुणिद शासकों के प्राप्त हुए हैं।
• इन सिक्कों पर शिवदत, शिवपालित, गोमित्र, और हरिदत्त आदि के नाम अंकित हैं।
• समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति में उत्तराखंड का नाम कर्तपुर उल्लेखित है।
• गोपेश्वर, कालीमठ, केदारनाथ तथा नाला क्षेत्र में मंदिरों की दीवारों पर लेख है।
• देवप्रयाग ( वामन गुफा ) तथा कल्पनाथ में गुफाओं के अंदर दीवारों पर लेख है।
• बाड़ावाला ( देहरादून) और नैनिताल में ईंटों पर उत्कीर्ण लेख हैं।
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